27. कैसे करें धन्यवाद?

शब्दों के अभाव में,
अर्थों का मोल चूक ना जाना,
‘गुरु गोबिंद’ से करते हैं प्रार्थना,
हम निशब्दों को ठुकरा मत देना,
क्षीण है करने में पूर्ण शुक्राना,
दो छटांक की ये जीह्वा,
कम पड़ेगा संग्रह विचारों का,
सीमित है दायरा उनका,
श्वाँसें भी कम पड़ेंगी,
सीमा में हैं वो बँधी,
रोम – रोम भी अगर बोल उठा,
पूर्ण आभार तब भी प्रकट ना होगा,
संचित कर्मों से ले लो सहायता,
उनका भी हैं कहाँ ठिकाना,
पल जो जिए हैं हमने,
वो भी कितने हैं अधूरे,
सभी सपनों का ले लो सहारा,
पर क्षणिक है आस्तित्व उनका,
रक्त का एक – एक कतरा,
भावों को कहाँ समझेगा,
ले दे के अब बस बचे हैं आँसू,
शायद उनसे भर जाए अनंत सिंधु,
कैसे करे धन्यवाद ‘उसका’,
कि पीछे छूट जाए हमारे शब्दा। ‘तरुण’

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